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मनहूस कौन ? : अकबर-बीरबल की कहानियाँ

                           मनहूस कौन ?


बादशाह अकबर के महल में एक नौकर था,

जिसके बारे में कहा जाता था कि वह मनहूस है और सुबह-सुबह जो भी उसकी सूरत देख लेता है,

उस दिन वह मुसीबतों से घिरा रहता है।

एक दिन अकबर जैसे ही सोकर उठे तो उस नौकर को देख लिया।

पहले उनका पोता बीमार हो गया। फिर किसी ने आकर बताया कि बेगम का भाई किसी दुर्घटना में घायल हो गया।

बाद में अकबर के पेट में बहुत तेज़ पीड़ा हो गयी।

बुरी खबर, भूख और दर्द के कारण अकबर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

इसका दोषी अकबर ने उस नौकर को ठहराया और दरबार में हर व्यक्ति पर संकट देखकर, अकबर ने उस नौकर को फांसी पर चढ़ाने का हुक्म दिया।

नौकर बीरबल के पास पहुंचा।

बीरबल बादशाह के पास गये और बोले, "जहांपनाह, मैं यहां उस नौकर की मासूमियत साबित करने आया हूं।

क्या मैं उससे आपके सामने एक प्रश्न कर सकता हूं ?" अकबर सहमत हो गये।

बीरबल ने नौकर को बुलाया और पूछा, "वह पहला व्यक्ति कौन था, जिसे तुमने कल सुबह सबसे पहले देखा था ?"

नौकर ने कहा, "बादशाह।"

बीरबल, "जहांपनाह, आपने कल सुबह सबसे पहले इस नौकर को देखा तो आपको कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा।

लेकिन इसने आपको देखा तो उसे तो अपना जीवन गंवाना पड़ रहा है। अब बताइए बड़ा मनहूस कौन है ?"

बीरबल की बात को समझकर अकबर ने नौकर की फांसी टलवा दी और बोले, "तुम सही हो मैंने न्याय करने में जल्दबाजी की।"

शिक्षा : सौभाग्य और दुर्भाग्य हमारी सोच से ही निकलता है न कि बाहरी कार्यों से।
मेहनत और तरीके से किया गया कार्य दुरुपयोग को सौभाग्य में बदल सकता है।

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